मिडिल ईस्ट में फिर भड़की जंग! अमेरिका के ताबड़तोड़ हमले, ईरान बोला- अब सिर्फ जवाब होगा
नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का नया दौर शुरू किया है, जबकि ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है। क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों के बीच हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा
ईरानी सरकारी मीडिया और सैन्य सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी हमले मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों, मिसाइल अड्डों और रणनीतिक ठिकानों पर किए गए। इन हमलों में सैन्यकर्मियों के साथ-साथ नागरिकों के भी हताहत होने का दावा किया गया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाना था जिन्हें अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है।
ईरान का सख्त संदेश
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि देश फिलहाल पूरी तरह "रक्षा मोड" में है और मौजूदा हालात में किसी तरह की बातचीत या समझौते की कोई योजना नहीं है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकार का पूरा ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा पर केंद्रित है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
मौजूदा संकट का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
हाल के दिनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों, नौसैनिक गतिविधियों और समुद्री नाकाबंदी को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। अमेरिका ने समुद्री सुरक्षा के नाम पर अपनी सैन्य कार्रवाई तेज की है, जबकि ईरान इसे आक्रामक कदम बता रहा है।
लगातार हो रहे हैं मिसाइल और ड्रोन हमले
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है।
इन घटनाओं ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
भारत ने ईरानी राजनयिक को किया तलब
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हालिया हमलों में भारतीय नाविकों के प्रभावित होने के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरान के वरिष्ठ राजनयिक (उप मिशन प्रमुख) को तलब कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। यह कदम हालिया समुद्री हमलों के बाद उठाया गया, जिनमें भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत समुद्री व्यापारिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित किया जाना बेहद आवश्यक है।
भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है।
शांति की अपील
भारत ने सभी संबंधित पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया है।
सरकार का कहना है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है।
भारत ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को किसी भी परिस्थिति में निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
तेल बाजार पर असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या अवरोध से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया, वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।
स्थिति पर नजर
फिलहाल क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। दोनों पक्षों की ओर से कड़े बयान और सैन्य गतिविधियां जारी हैं। ईरान ने बातचीत से इनकार करते हुए रक्षा पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की बात कही है, जबकि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा से जोड़ रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास इस संकट की दिशा तय करेंगे।

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